तीरथ सिंह रावत जब से मुख्यमंत्री बने है तबसे वह सुर्ख़ियों के बादशाह बन चुके है। ऐसा लगता है की वो राजनीती के ‘कॉन्ट्रोवर्सिअल किंग’ है जैसे बॉलीवुड में कंगना ‘कॉन्ट्रोवर्सिअल क्वीन’ है। पिछले कुछ समय से उन्होंने कुछ ऐसे बयान दे दिए है जिनपर लोगो ने काफी सवाल खड़े किये। उनका ये बयान की औरतो को फटी जीन्स नहीं पहननी चाहिए काफी ज्यादा विवाद में शामिल हुआ था।

यहाँ तक की ट्विटर पर #ripped jeans से सबसे पहले नंबर पर ट्रेंड कर रहा था। इतना ही नहीं, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना श्री राम से कर दी थी और बोला था की लोग इनकी पूजा करेंगे, तब भी उनका ये कहना एक मुद्दा बनकर सामने आया था। और अब एक बार फिर से उन्होंने एक बेतुका बयान दे दिया है जिस्से वह दुबारा विवादों में फस रहे है।

जैसा की सब जानते है की हरिद्वार में आजकल महाकुम्भ चल रहा है। लाखो लोग इस महाकुम्भ में शामिल हो रहे है जबकि लोगो को पता है की कोरोना अभी ख़त्म नहीं हुआ है बल्कि और ज़्यादा बढ़ रहा है। इसी महाकुम्भ को लेके, तीरथ सिंह रावत ने एक बार फिर से लोगो को मजबूर कर दिया है की उनकी बात करि जाये। उन्होंने कहा कि कुंभ में मां गंगा की कृपा से कोरोना नहीं फैलेगा। साथ ही कहा है कि कुंभ और मरकज की तुलना करना गलत है।

उनके मुताबिक पिछले साल दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से कोरोना बंद कमरे से फैला, क्योंकि वहां सभी लोग एक कमरे में थे, जबकि हरिद्वार में कुंभ क्षेत्र नीलकंठ और देवप्रयाग तक खुले वातावरण में है। कुंभ में लाखों की भीड़ और कोरोना गाइडलाइन का पालन न होने पर उठ रहे सवालों पर रावत ने कहा, ‘हरिद्वार में 16 से ज्यादा घाट हैं। इसकी तुलना मरकज से नहीं की जा सकती।’

इससे पहले एक बातचीत के दौरान सीएम रावत ने कहा था कि दूसरे शाही स्नान में अखाड़ों के संत समाज से लेकर लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं ने हरिद्वार कुंभ में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमाये और सोमवती अमावस्या पर हुए दूसरे शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह भी देखने को मिला। प्रशासन का कहना है कि कुंभ क्षेत्र में उन्हीं श्रद्धालुओं को एंट्री दी जा रही है, जिनके पास RT-PCR निगेटिव रिपोर्ट है।

लेकिन हकीकत कुछ और ही है। केंद्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि कुंभ कोरोना का सुपर स्प्रेडर बन सकता है। राज्य को सावधानी रखनी चाहिए। आईजी संजय गुंज्याल ने बताया कि लोगों से लगातार कोविड नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है लेकिन भीड़ के कारण चालान जारी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। घाटों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करना बहुत मुश्किल है, अगर हम सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराएंगे तो भगदड़ जैसी स्थिति हो सकती है।

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