गहलोत सरकार की 4 सीटों पर जीत की पूरी आशा

आप सभी जानते हो की जब भी कोई खेल खेला जाता है, तो उसमें प्रत्येक खिलाडी़ की एक अहम भूमिका रहती है और हर एक खिलाडी़ में अपना एक हुनर छुपा रहता है। चलिए आपको आपके पसंदीदा खेल के माध्यम से समझा देते है की क्रिकेट चल रहा है और सामने क्रिस गेल जैसे बल्लेबाज खेल रहे है और इन्हें मैच जितने के लिए महज 4 रन चाहिए और आखरी ओवर शुरू होने जा रहा है तो ऐसे में विराट की कोशलता और अनुभव ही मैच को जीता सकता है, तो कप्तान ने बुमराह को बॉल थमा दी और जैसे ओवर शुरू हुआ पहली ही बॉल पर गेल आउट।

उसी तरह राजनीती भी एक गेम है। इन दिनों राजनीती का टूर्नामेंट मतलब उपचुनाव चल रहे है और सामने बल्लेबाजी बीजेपी कर रही है और गेंदबाज़ी कांग्रेस के हाथ में है। अब कप्तान अशोक गहलोत ने भी आखरी ओवर अपने तेज़ बॉलर सचिन को दी, सचिन तेंदुलकर नहीं राजनीती के सचिन पायलट की जो की बीजेपी को 4 सीटों पर ऑल आउट करते है या फिर बाउंड्री पार जाती हुई बॉल को देखते है।

हर गेम को खेलने से पहले तैयारी की जाती है तो ज़रा कांग्रेस की भी तैयारी देख लेते है। तो तैयारी कुछ ऐसी चल रही है की धरो के स्थान राजस्थान में 4 सीटों पर उपचुनाव की रणनीति बनाने में जुट गई है। 27 फ़रवरी को कांग्रेस ने किसान सम्मलेन के नाम पर उपचुनाव का शंखनाद किया था।

कांग्रेस को एक ऐसे गेम चेंजर की जरूरत है जो गेम को जीता सके। इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा 4 सीटों पर पायलट को उतारेंगे क्योंकि इन 4 सीटों में से सहाडा और राजसमंद सीटें गुर्जर बहुल की हैं। यहां अच्छी तादाद में गुर्जर वोट बैंक है जो सचिन पायलट के कहने पर कांग्रेस को वोट कर सकता है,बशर्ते अगर पायलट की नाराजगी की खबरें अब भी जारी रही तो इस वोट बैंक के बैलेंस को बीजेपी कहीं अपनी FD ना बना ले।

वहीं बाकी बची 2 सीटो की बात करे तो सुजानगढ़ और वल्लभनगर में खुद पायलट का व्यक्तिगत लगाव है क्योंकि सुजानगढ़ के विधायक मास्टर भंवरलाल थे जो सचिन पायलट के प्रदेश अध्यक्ष रहते सचिन पायलट के बड़े सहयोगी थे। उनके बेटे को जिताने के लिए वह पूरा प्रयास करेंगे। वहीं वल्लभनगर के विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत तो उनके साथ नाराजगी के समय भी थे और उनके साथ मानेसर भी गए थे, यहाँ पायलट पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है वह अपनी मर्जी से कांग्रेस के लिए प्रचार कर सकते है बशर्ते भंवरलाल मेघवाल के बेटे और गजेंद्र सिंह शक्तावत की पत्नी को कांग्रेस टिकट दे।

बात करे राजसमंद विधानसभा सीट की तो यहाँ पर लगातार डेढ़ दशक से भाजपा राज है। इस बार राजसमंद की भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी का निधन होने के कारण कांग्रेस पार्टी को आस है कि सत्ताधारी दल होने के कारण और भाजपा के पास कैंडिडेट की कमी होने के चलते कांग्रेस इन चुनाव में जीत दर्ज कर सकती है।

कुछ इस तरह की राजनीती तैयारी के साथ टीम के कप्तान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी टीम के साथ नज़र आ सकते है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और प्रदेश प्रभारी अजय माकन को बाउंड्री पर खड़ा करके सचिन को आखरी ओवर थमा दिया गया। अब देख़ते है विपक्ष शॉट लगाता है या फिर आउट होता है।

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