राजगढ़/अलवर/रामरतन मीणा!
अशोक बाबा रामदेव का कोरेना की वजह से निधन अशोक मीणा तीन-चार दिनों से हल्का बुखार था और अपना चिकित्सकों की सलाह से इलाज ले रहे थे। पर यह प्रकृति को मंजूर नहीं था और आज अशोक मीणा चित्र निंद्रा में हमेशा के लिए सो गए। मृत्यु की की खबर सुबह सोसल मीडिया पर डालीं गई तो पूर्वी राजस्थान में आग की तरह फैल गई। अलवर जिले के छाजूरामपुरा गांव में जन्मे अभिनेता, समाज सेवक, गरिबों के साथ लगने वाला, मीणा समाज का कद्दावर प्रवक्ता अशोक बाबा रामदेव ने। मालाखेड़ा तहसील के छोटे से गांव छाजू रामपुरा में 29 नवंबर 1979 को रेलवे के एक साधारण कर्मचारी राजपाल मीणा के घर जन्मे अशोक ने अपनी मां कमला मीणा से मीणावाटी के लोकगीत व लोक संस्कृति को जाना तो अपने पिता से बहादुरी व स्वछंदता का पाठ पढ़ा था। पिता के रेलवे में होने के कारण इनकी 12वीं तक की पढ़ाई बीकानेर में हुई। लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण यह युवा अपनी आगे की पढ़ाई को पूर्ण नहीं कर पाया।

शायद अशोक मीणा की पढ़ाई पूरी होती तो यह भी किसी न किसी सरकारी नौकरी होते। लेकिन प्रकृति को यह मंजूर नहीं था। क्योंकि इनका जन्म तो कुछ और ही करने के लिए हुआ था। जिससे इनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बन पाए। इस युवा ने अपनी मेहनत और अपने अभिनय के दम पर फिल्म इंडस्ट्रीज में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई । सत्य घटना पर आधारित भूमि प्रोडक्ट की राजस्थानी फिल्म जरायम दादरसी में क्रांतिकारी सावंता मीणा का जीवंत किरदार निभा कर अशोक बाबा रामदेव ने दृशको की आंखों में पानी ला दिया। इसके साथ अशोक बाबा रामदेव ने हिंदी फिल्म लव वर्सेज फ्रेंडशिप, वन मैन आर्मी, रेपर एन काउंटर में भी अपने अभिनय की अशोक बाबा रामदेव समाज के कद्दावर प्रवक्ता थे। यह बीकानेर मीन सेना जिला प्रमुख रहे, अलवर जिले के मीणा समाज का जिला अध्यक्ष,अलवर मीन सेना जिला प्रमुख, डॉक्टर किरोड़ी लाल के साथ विभिन्न आंदोलनों में अपनी भूमिका निभाई।

मालाखेड़ा से राजगढ़ तक दुर्घटना होने वाले लोगों को हॉस्पिटल पहुंचाना,उनके परिजनों को सूचना देना ,गरीब भूखे लोगों को अशोक बाबा रामदेव होटल पर रोज नि शुल्क खाना खिलाता उनको सकुशल अपने घर तक भेजता सामाजिक सेवा में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। एक दबंग कद्दावर नेता के रूप में निडर होकर समाज की बड़ी-बड़ी आदीवासी पंचायतों में अलवर जिले की आवाज बुलंद करते हुए गहरी छाप छोड़ गए। जरायम दादरसी में सावंता मीणा के किरदार को निभाने वाले अभिनेता अशोक बताते थे कि इस किरदार को निभाते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। क्योंकि गांव का एक भोला भाला मेहनती किसान सामंत वादियों व अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों से तंग आकर हथियार उठाकर डाकू बन जाता है और फिर वह क्रांतिकारियों के साथ मिलकर जरायम दादरसी जैसे कानून के विरुद्ध अपने समाज के लोगों को जागृत करता है।

अशोक मीणा बताते थे कि जब इस किरदार को निभाते हुए इतनी पीड़ा हुई तो आप यह देखिए मेरे समाज के लोगों पर उस समय कितने जुलम हुए होंगे जब जरायम दादरसी जैसा काला कानून लागू था । हिंदी व राजस्थानी फिल्मों के साथ-साथ इनकी कई सामाजिक सरोकारों से परिपूर्ण लघु फिल्में भी आई है वहीं दूसरी तरफ इन के गानों के एल्बम भी बाजार में आये हैं । जरायम दादरसी राजस्थानी फिल्म में मीणावाटी का एक लोकगीत जो सभी की जुबान पर चढ़कर बोला वह था कल जूग आ ग्यौ रै जमानो नई बहू जेठ सूं बोलै । आज अपने अभिनय के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अशोक बाबा रामदेव ने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई थी। प्रकृति इस युवा अभिनेता की दिव्यगत आत्माओं को शांति दे।

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