17 अप्रैल को प्रदेश में 3 जगहों पर मेला लगने वाला है। लेकिन यह कोई रामदेवरा का मेला नहीं, यह चुनावी मेला है जो राजसमंद, सहाड़ा, सुजानगढ़ में लगने वाला हैं। लेकिन आज मैं यहां सिर्फ सहाड़ा की बात करू तो यहां भी चुनावी रणनीतियां अपने चर्म पर है लेकिन यह रणनीति और भी मजेदार बनती नज़र आ रही है।

क्योंकी जब आमने सामने 2 ऐसे प्रतिद्वंदी हो जो हारने का नाम तक नहीं लेते तो यही मज़ा और बढ़ जाता है, जब दोनों प्रतिद्वंद्वियों को एक दूसरे की सभी दाव पेंच की पूरी ख़बर हो। तो ऐसा ही कुछ इन दिनों भीलवाड़ा में स्थित सहाड़ा विधानसभा सीट पर देखने को मिल रहा है।

इन दिनों अगर कांग्रेस की रणनीति की बात करू तो उसने अपनी जीत के लिए गीनी चुनी चाल यहां बना ली है। यहां सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने अब तक 14 विधानसभा चुनाव लड़े और उनमें से 9 चुनाव जीती भी, तो ऐसे में यह भी साफ जाहिर होता है कि जो पार्टी 9 बार सीट ले सकती है तो 10 वीं बार सीट लाना कोई इतना मुश्किल नहीं होगा। जबकि बात करे बीजेपी कि तो वह सिर्फ 2 ही बार अपनी सीट ला पाई।

सहाड़ा में जातिगत ,राजनीति समीकरण का भी कांग्रेस को काफी फायदा मिल सकता है। अगर बात यहां राजनीति समीकरण की करे, तो यहां 3 बार के विधायक कैलाश चंद्र त्रिवेदी की अच्छी खासी पकड़ मौजूद है, और उनके निधन के बाद भी उनको कांग्रेस के लिए सहानुभूति वोट भी मिल सकते है।

यह तो कांग्रेस की वह FD है जो कांग्रेस को सहाड़ा सीट जीतने के लिए काफी है। लेकिन कांग्रेस सरकार ने अपनी जीत को निश्चिंत करने के लिए सहाड़ा में विकास का पिटारा भी खोला जिसमे गर्ल्स कॉलेज, सड़क,चिकित्सा, शिक्षा, पयेजल यह सभी अपने विकास के पिटारे से सहाड़ा को दिया।

अगर अब यहां बीजेपी की बात करू तो यहां बीजेपी ने अपनी कुछ खास पकड़ नहीं बनाई लेकिन इस बार वह मोदी लहर के माध्यम से सहाड़ा सीट को मोदी लहर में उड़ा कर अपने पाले में लाना चाहती है। वहीं कांग्रेस के गढ़ सहाड़ा को भेदने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। बीजेपी ने जाट बहुल सीट से रतनलाल जाट को उम्मीदवार उतारा है ताकि कांग्रेस के जातीय समीकरण चक्र को तोड़ा जा सके।

लेकिन बीते दिनों कांग्रेस के गले में एक हड्डी फस गई और यह एक ऐसी हड्डी थी जो समय रहते प्रदेश कांग्रेस सरकार को सहाड़ा से उखाड़ने के लिए काफी थी। यह हड्डी डॉ. किरोड़ी लाल मीणा बने हुए थे जो की बीते 8 दिनों से मृत पुजारी का शव लेकर धरना दे रहे थे। अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तो अगला धरना स्थल सहाड़ा को चुना गया, जहां की ब्राह्मण मतदान की संख्या 40 हज़ार से ज्यादा है, जो कांग्रेस की जीत की आशा पर पानी फेरने के लिए काफी है।

लेकिन इस धरने में यह भी कयास लगाए गए की डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के धरने को बीजेपी के नेताओं ने हाईजैक कर लिया, शायद बीजेपी का ही सहाड़ा को धरना स्थल बनाने का सुझाव दिया गया हो, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे समय पर निकाल लिया है। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की सभी मांगे मानकर अब इन मांगों को मानना गहलोत सरकार के लिए कितना सफल साबित होगा, 2 मई को किरोड़ी लाल मीणा नहीं सहाड़ा विधानसभा सीट खुद ही बता देगी

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