• DNA Vaccine for Covid : जानिए ZyCoV-D कैसे करता है काम ?:

    Shikha Sharma

    Jul-21-2021 07:34:53 PM Delhi

    कोरोना वायरस जिससे पूरा  विश्व जूझ रहा है | वही भारत मे कोरोना महामारी से निपटने के लिए तेजी से टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत में अभी तीन वैक्सीन (कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक-वी) का टीका लगाया जा रहा है। लेकिन अब भारत को एक और वैक्सीन मिलने वाला है। इससे देश में टीकाकरण अभियान में तेजी आएगी। यह स्वदेशी वैक्सीन है। सबसे खास बात कि यह दुनिया की पहली DNA आधारित कोविड वैक्सीन होगी। वही इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने संसद में कहा है कि भारत कोरोना वायरस के खिलाफ डीएनए वैक्सीन लाने वाला दुनिया का पहला देश बनने जा रहा है. इसे अहमदाबाद स्थित ज़ायडस कैडिला ने तैयार किया है और इसका नाम है - ZyCoV-D. इसी महीने ज़ायडस ने कहा था कि उसने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से दुनिया के पहले डीएनए वैक्सीन के लिए आपताकाल इस्तेमाल की इजाज़त ले ली है जिसके तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के शुरुआती नतीजों के बाद पाया गया कि ये कोरोना के खिलाफ 66.6 फीसदी कारगर है.स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में बताया कि सितंबर-अक्टूबर तक बाजार में यह वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। वहीं, इस महीने की शुरुआत में Zydus Cadila ने कहा था कि उसने दुनिया के पहले प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से आपातकालीन इस्तेमाल के लिए प्राधिकरण से इजाजत मांगी थी।
    वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी ने घोषणा की है कि वैक्सीन के लिए आगे आए किसी भी स्वयंसेवी ने ट्रायल के बाद किसी बीमारी की शिकायत नहीं की है और न ही किसी की मृत्यु की बात आई है. इस तरह ZyCoV- D कोविड-18 के खिलाफ काम करने वाली पहली डीएनए आधारित वैक्सीन बन गई है. इसका तीसरे चरण का ट्रायल देश भर की 50 जगहों पर हुई और इसमें 28000 लोगों ने हिस्सा लिया. कंपनी ने कहा है कि ट्रायल दूसरी लहर की पीक के वक्त किया गया था और उम्मीद थी कि ये डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कारगर होगा. यही नहीं इस वैक्सीन को 12-18 तक की उम्र के बच्चों पर भी अपनाया गया और वह सुरक्षित पाए गए हैं.
    हालिया रिपोर्ट कहती हैं कि ड्रग रेग्युलेटर ने कंपनी से अतिरिक्त डाटा मांगा है और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद अगस्त में इस वैक्सीन को जारी किया जा सकता है. इस तरह भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के बाद यह पूरी तरह भारत में तैयार हुई दूसरी वैक्सीन बन जाएगी.अब आपको बता दे की किस श्रेणी की है वैक्सीन? जायडस की वैक्सीन जेनेटिक या न्यूकलिक एसिड वैक्सीन की श्रेणी में आती है. वायरस की जेनेटिक जानकारी का हिस्सा शरीर में डाला जाता है जो कोशिकाओं को वायरस के ऐसे तत्व को पैदा करने के लिए उकसाता है जिसे प्रतिरोधक प्रणाली पहचान ले और उस पर एंटीबॉडीज़ के जरिए हमला करे. ऐसा पहली बार है कि कोई जेनेटिक वैक्सीन इंसानों के लिए तैयार की गई है. गरीब देशों तक वैक्सीन पहुंचाने का काम करने वाली संस्था गावी कहती है- कई डीएनए वैक्सीन, जानवरों पर इस्तेमाल के लिए लाई गई हैं जैसे वेस्ट नील वायरस के खिलाफ लाया गया घोड़ों का वैक्सीन.

    ये बता दे की क्या होगी वैक्सीन की डोज की मात्रा?

    जहां ज्यादातर कोविड वैक्सीन के दो ही डोज़ लग रहे हैं (जॉनसन एंड जॉनसन की एक वैक्सीन को छोड़कर जिसका एक ही डोज़ लगता है), वहीं ZyCoV-D के तीन डोज़ लगने की बात कही जा रही है जिसे चार हफ्तों के अंतराल में लगाया जाएगा. हालांकि कंपनी का कहना है कि उसने 3 एमजी के साथ दो डोज़ का आकलन भी किया है जिसका असर तीन डोज़ जितना ही है.
    इसके साथ ही ये वैक्सीन - intradermal - है यानि इसमें सुई की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसकी वजह से साइड इफेक्ट का खतरा भी कम होगा. ऐसा कंपनी का कहना है. इसमें इंजेक्शन तो होता है लेकिन वो ज्यादा गहराई तक नहीं लगाया जाता, उसे त्वचा के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है. इसे 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जा सकता है. ज़ायडस के अलावा अब दुनिया की कई और कंपनियां भी डीएनए वैक्सीन पर विचार कर रही हैं |



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